Haridwar, Uttarakhand

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Haridwar

Sunday, June 27, 2010

ज्येष्ठ पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई गंगा में डुबकी

ज्येष्ठ पूर्णिमा में देश के विभिन्न भागों से आए श्रद्धालुओं ने गंगा मैया में डुबकी लगाई और पुण्य अर्जित किए। स्नान के साथ ही छह दिनों से चला आ रहा स्नान पर्व सम्पन्न हो गया है। श्रद्धालुओं ने गुरुओं और पुरोहितों के स्थानों पर जाकर दान-पुण्य किया।
शनिवार को हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान प्रातःकाल प्रारंभ हो गया था। स्नानार्थियों ने डुबकी लगाने के बाद पूर्णिमा की कथा का श्रवण किया और सूर्यदेव को अर्घ्य प्रदान किया। हरकी पैड़ी सहित गंगा के कईं घाटों पर श्रद्धालुओं ने हवन भी किए। ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व शनिवार को पड़ने से पर्व का महत्व विशिष्ट हो गया था। अनेक श्रद्धालुओं ने पूर्णिमा स्नान के बाद शनिदेव के मंदिरों में जाकर प्रार्थना की। गंगा दशहरे से प्रारम्भ हुए छह दिनों के स्नान शनिवार को सम्पन्न हो गए। अनेक श्रद्धालु पूर्णिमा तक के लिए हरिद्वार में रुके हुए थे। स्नानार्थियों में अधिकांश भीड़ राजस्थान, पंजाब और दिल्ली से आए यात्रियों की थी।

Tuesday, April 13, 2010

... मां मैं हरकी पैड़ी पर खड़ा हूं

भाग्यशाली हैं वें लोग, जिन्हें दूसरे शाही स्नान पर नागाओं के साक्षात दर्शन करने और गंगा मैया में डुबकी लगाने का पुण्य अवसर मिला। लेकिन हजारों लोग अलग-अलग वजहों से चाहकर भी हरिद्वार नहीं आ सके। हरिद्वार से सैंकड़ों-हजारों मील दूर बैठे ऐसे लोगों को उनके परिजनों ने मोबाइल फोन के माध्यम से नागा साधुओं के जयकारे सुनाए। अपने परिजनों को पुण्य लाभ दिलाने के लिए हरकी पैड़ी से अनेक श्रद्धालुओं ने शाही स्नान की लाईव कमेंटरी की।

हरकी पैड़ी स्थित घंटाघर के पास खड़ा युवक मोबाइल फोन पर किसी से बतिया रहा है। एकबारगी ऐसा लगता है कि जैसे युवक किसी टीवी चैनल के लिए फोनो कर रहा है। लेकिन अगले ही पल कानों में आवाज आती है... मां मैं हरकी पैड़ी पर ही खड़ा हूं, नागा बाबाओं का शाही स्नान चल रहा है, जयकारों की आवाज तो आ रही होगी मां॥। इसके बाद समझ में आता है कि युवक कहीं दूर बैठी अपनी मां को शाही स्नान का आंखों देखा हाल बता रहा है। सोमवार को हरकी पैड़ी पर खड़े अनेक लोग इसी तरह मोबाइल पर शाही स्नान के बारे में परिजनों को जानकारी देते रहे। किसी ने बूढ़ी दादी तो किसी ने अशक्त दादा को मोबाइल के माध्यम से पुण्यलाभ दिलाया। कई श्रद्धालुओं ने परिजनों को दिखाने के लिए मोबाइल फोन से वीडियो फिल्म बनाई, फोटो भी खींचे। संगरूर, पंजाब से आए जसवीर सिंह ने बताया कि नानी कई दिनों से कुंभ स्नान करने की इच्छा जता रही थी, लेकिन ऐन वक्त पर उनकी तबीयत खराब हो गई। मैं शाही जुलूस के साथ-साथ चला और नानी को जयकारों की आवाज मोबाइल के माध्यम से सुनाता रहा। उनका कहना है कि मन में श्रद्धा हो तो संत दर्शन और गंगा स्नान का लाभ केवल आवाज सुनकर भी कमाया जा सकता है।



सोजन्य : अमर उजाला हिंदी दैनिक

मां गंगा में डुबकी लगा हुए एकरस

कुंभनगर (हरिद्वार)। कुंभ के दूसरे शाही स्नान और सोमवती अमावस्या पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ सोमवती अमावस को गंगा में डुबकी लगाकर बीती रात 12 बजे से ही लौटने लगी थी। जितने लोग वापस जा रहे थे, उतने ही आ रहे थे।

यह था नजारा रविवार की रात 12 बजे से लेकर सोमवार शाम तक हरिद्वार कुंभ का। अलग-अलग संप्रदायों के लोग तरह-तरह के तिलक लगाए और वेशभूषा धारण किए इस कुंभ स्नान का पुण्य लाभ कमाने मां गंगा की शरण में पहुंचे थे। जिसने भी डुबकी लगाई, जब वह बाहर निकला तो एकरस सा हो गया था। न कोई तिलक, न त्रिपुंड और न कोई खास वेशभूषा। सब एक से नजर आ रहे थे। यही तो है मां गंगा, जो भी श्रद्धा से उसकी शरण में आता है, सब पापों को धोकर एक समान कर देती है। स्नानार्थी 16 चक्रव्यूह से गुजरते हुए हरकी पैड़ी तक पहुंचे।

कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच हरिद्वार से लेकर ऋषिकेश तक 360 वर्ग किमी क्षेत्र में कहीं ऐसी जगह नजर नहीं आ रही थी, जहां श्रद्धालुओं की भीड़ मां गंगा की गोद में स्नान न कर रही हो। देश-विदेश से आए 50 लाख श्रद्धालुओं ने जहां पवित्र गंगा में डुबकी लगाई, वहीं तेरह अखाड़ों के हजारों साधु-संन्यासियों ने धूमधाम से जमात निकालकर शाही स्नान किया। हरकी पैड़ी स्थित ब्रह्मïकुंड पर देर शाम तक अखाड़ों का स्नान चलता रहा। सुबह 8।30 बजे हरकी पैड़ी को जनता से खाली कराया गया। मुख्य आकर्षण शाही स्नान के लिए सोमवार को जब निरंजनी अखाड़े का जुलूस निकला, तो श्रद्धालुओं में दर्शन की होड़ लग गई। हर-की-पैड़ी पर भी हजारों लोग दम साधे बैठे उस अद्भुत दृश्य को देख रहे थे, जब अखाड़े के देवता भगवान कार्तिकेय को अभिषेक के बाद उन्हें स्नान कराया गया। 11.15 बजे निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी पुण्यानंद गिरी नागा सन्यासियों और संतों के साथ गंगा में स्नान के लिए उतरे, तो दर्शन के लिए बैठे श्रद्धालुओं के जयघोष से गंगा तट गूंज उठा। फिर जो सिलसिला शुरू हुआ तो जूना, निर्वाणी, बैरागी, निर्मोही समेत 13 अखाड़ों के नागा, वैष्णव, वैरागी, उदासीन सन्यासियों का स्नान चलता रहा। शाही जुलूस में चल रहे संतों ने फूल-माला भी श्रद्धालुओं की ओर फेंकी, जिसे मिली उसने सहेजकर रख ली, प्रसाद की तरह। दो शंकराचार्यों स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती और स्वामी निश्चलानंद सरस्वती ने एक साथ ब्रह्मकुंड में डुबकी लगाई।


सोजन्य : अमर उजाला हिंदी दैनिक

Heavy rush on Last Bath on Kumbh Mela 2010

आज कुम्भ मेला २०१० का अंतिम शाही स्नान है । इस उपलक्ष में श्रधालुओं की भीड़ अभूतपूर्व है । माना जा रहा है के आज के नक्षत्रो की दशा 585 सालों के बाद आया है। अनुमान के अनुसार गंगा माँ मे लगभग 1 करोड़ लोगों के स्नान करने की संभावना है ।

Friday, February 12, 2010

हरिद्वार मे शताब्दी का सबसे बड़ा तीर्थ पर्व " महाकुम्भ " चलरहा है। अतः यदि आप भी पुण्य के भागी बनना चाहते है तो हरिद्वार मे आकर गंगा माँ मे स्नान तथा संत - महात्माओ के दर्शन करे ।
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The holy festival of Kumbh is the most sacred celebration for Hindus. The festival falls every 3 years and is celebrated in 4 different cities, viz., Allahabad, Haridwar, Ujjain and Nasik. According to popular belief, Kumbh mela has the powers to the wash away all the sins of a person and free him from the cycle of birth-rebirth, of those who participate in them with full devotion. The festival is held at the banks of Ganga in Haridwar, as Haridwar is the place where Ganga enters plains, from hilly region.